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    कितने नंबरों पर मिलेगा सरकारी या प्राइवेट कॉलेज में MBBS में एडमिशन, करियर काउंसलर से जानें नीट काउंसलिंग से जुड़ी ये 10 खास बातें 

    इस साल एमबीबीएस कोर्स में दाखिले की परीक्षा नीट (NEET) का परिणाम 16-17 अगस्त तक आने की उम्मीद की जा रही है। इसके बाद शुरू होगा काउंसलिंग का दौर, जिसके लिए आपको मानसिक रूप से तैयार रहना जरूरी है। बता रहे हैं राकेश जैन

    नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद छात्र को एडमिशन लेने के लिए मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग की प्रक्रिया में भाग लेना पड़ता है। हालांकि इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रखी जाती है, फिर भी मेडिकल कॉलेज की लोकप्रियता, फीस, डिमांड और सप्लाई में बहुत बड़ा फर्क होने के कारण ये प्रक्रिया बहुत जटिल हो जाती है। इसीलिए परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद काउंसलिंग आपको सही कोर्स पाने में मदद करने का उपयुक्त रास्ता बन सकती है। पर काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर लोग जागरूक कम ही हैं।

    कुछ लोग इस संदर्भ में काउंसलर की भूमिका को भी विश्वसनीय नहीं मानते और इसे पैसे बनाने का जरिया मानते हैं, जबकि एक अच्छा काउंसलर न सिर्फ आपको काउंसलिंग प्रक्रिया की जानकारी देता है, बल्कि आपको उस प्रक्रिया में होने वाले बदलावों और उनके असर से भी अवगत करवाता है। वो अपने अनुभव और पुराने डाटा के आधार पर सभी मेडिकल कालेज में आपके एडमिशन की संभावनाओं को आंकता है। हर गलती से सावधान करके ना सिर्फ आपके पैसे खराब होने से बचाता है, बल्कि आपको आपके रैंक, कैटेगरी, डोमिसाइल और फी बजट के हिसाब से सबसे अच्छे मेडिकल कालेज में एडमिशन लेने में सहायता करता है।

    साल 2022 में नीट का आधिकारिक परिणाम 16-17 अगस्त के आसपास आने की उम्मीद है। उससे करीब एक हफ्ता पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ईमेल पर ओएमआर की स्कैन और सिरीज के प्रश्नपत्र के उत्तर भेजेगा। रिजल्ट घोषित होने के 7 से 10 दिन के बाद मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो जाती है। ये पूरी प्रक्रिया चार महीने तक चलेगी, जिसमें आप धैर्य और जानकारी से बहुत अच्छे कॉलेज में एमबीबीएस सीट पर प्रवेश पा सकते हैं।

    मैं अपने अनुभव के आधार पर आपको एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बताना चाहूंगा। मुझे विश्वास है कि ये आपके बेहतर भविष्य के लिए सहायक सिद्ध होंगी।

    ● सबसे पहले आपको ये समझना जरूरी है कि एमबीबीएस, बीएएमएस, बीडीए, बीएचएमएस, बीएससी नर्सिंग में एडमिशन सिर्फ काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से होता है।

    ● किसी भी सीधी भर्ती देने वाले बहकावे में आकर अपना पैसा और वक्त खराब न करें।

    ● काउंसलिंग प्रक्रिया में आवेदन करने के लिए आपको नीट उत्तीर्ण करना आवश्यक है। सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए क्वालीफाइंग कटऑफ 50 पर्सेंटाइल की होती है। अनुसूचित जाति जनजाति के बच्चों के लिए यह कट ऑफ 40 पर्सेंटाइल की होती है।

    ● बीते साल कट ऑफ 138 रहा था, इस साल कटऑफ मार्क 130-135 के बीच रहने की संभावना है। इसका मतलब ये है कि एमबीबीएस में एडमिशन के लिए आपके नंबर इससे ज्यादा आने चाहिए।

    ● मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग से सम्बंधित सभी जरूरी जानकारी ले लेना समझदारी होगी।

    ● जनरल कैटेगरी में अगर बच्चे के 600 से ऊपर नंबर आते हैं, तो उसको गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन मिलने की संभावना बहुत ज्यादा हो जाती है। 580 से 600 के बीच ये संभावना धीरे-धीरे कम होती जाती है।

    ● 580 से नीचे नंबर आने पर गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन की संभावना सामान्य तौर पर खत्म हो जाती है। उस से कम नंबर आने पर सिर्फ प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में एबीबीएस में एडमिशन हो सकता है।

    ● प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्चा सालाना कम से कम 6.5 लाख रुपए से शुरू हो कर 25 लाख रुपए तक होता है। इसके अलावा, हॉस्टल का खर्चा अलग से 1.5-2 लाख रुपए तक होता है।

    ● किसी भी गवर्नमेंट, प्राइवेट या डीम्ड मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए किसी भी तरह की डोनेशन नहीं चलती। किसी भी लालच में आकर अपना नुकसान ना करें।

    ● अगर बच्चे के नंबर पहले प्रयास में 450 से ऊपर आए हैं, तो उसको अगले साल के प्रयास करने का फायदा हो सकता है, परंतु 400 से कम नंबर आने पर दूसरे प्रयास की जगह दूसरे कोर्स के बारे में सोचना बेहतर रहेगा।

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